Page Nav

HIDE

Grid

GRID_STYLE

Pages

Classic Header

{fbt_classic_header}

Top Ad

//

Breaking :

latest
//

फटी गर्दन की नस, आंबेडकर अस्पताल के डॉक्टरों ने बचाई मरीज की जान

  रायपुर: जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष का नजारा डॉ. आंबेडकर अस्पताल के हार्ट, चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग में देखने को मिला। 40 वर्षीय मर...

 


रायपुर: जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष का नजारा डॉ. आंबेडकर अस्पताल के हार्ट, चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग में देखने को मिला। 40 वर्षीय मरीज घर पर दांत साफ कर रहा था, तभी अचानक उसके गले में तेज दर्द हुआ और गर्दन में सूजन फैल गई। कुछ ही मिनटों में वह बेहोश हो गया।

परिजन उसे तुरंत डॉ. आंबेडकर अस्पताल के आपातकालीन विभाग लेकर पहुंचे। जांच में पता चला कि मरीज की दायीं कैरोटिड धमनी, जो हृदय से मस्तिष्क तक रक्त का प्रवाह सुनिश्चित करती है, अपने आप फट गई थी। इस दुर्लभ स्थिति को चिकित्सकीय भाषा में स्पान्टेनियस कैरोटिड आर्टरी रप्चर कहा जाता है।

दुनिया भर में सिर्फ 10 मामले दर्ज

विशेषज्ञों के अनुसार, यह घटना बेहद दुर्लभ है और विश्व मेडिकल जर्नल में ऐसे केवल 10 मामले ही दर्ज हैं। स्थिति इतनी गंभीर थी कि मरीज की जान हर पल खतरे में थी। डॉ. कृष्णकांत साहू के नेतृत्व में हार्ट, चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग की टीम ने तुरंत ऑपरेशन की योजना बनाई। गर्दन में खून का जमाव और धमनी की स्थिति के कारण आपरेशन अत्यंत चुनौतीपूर्ण था। छोटी सी चूक भी मरीज के लिए लकवा या ब्रेन डेड होने तक का कारण बन सकती थी।

सफल रहा ऑपरेशन

कई घंटे की जटिल प्रक्रिया में टीम ने बोवाइन पैच की मदद से फटी धमनी की मरम्मत की गई। हर कदम पर सावधानी बरती गई। ऑपरेशन सफल रहा और राहत की बात यह रही कि मरीज को किसी भी तरह का लकवा नहीं हुआ। अब वह पूरी तरह स्वस्थ है और सामान्य जीवन जी रहा है।

चिकित्सकों ने बताया कि आमतौर पर कैरोटिड धमनी फटने की घटनाएं एथेरोस्क्लेरोसिस, चोट या संक्रमण के कारण होती हैं, लेकिन यह मरीज पूरी तरह स्वस्थ था। इसलिए यह मामला और भी दुर्लभ माना जा रहा है।

स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने इस उपलब्धि पर चिकित्सालय की टीम को बधाई दी और इसे प्रदेश के लिए गर्व का विषय बताया। विशेषज्ञों के अनुसार इस तरह की सफल सर्जरी ने छत्तीसगढ़ में जीवन रक्षक चिकित्सा क्षेत्र में एक नया मील का पत्थर स्थापित किया है।

No comments